Thursday, September 10, 2009

उपनिषद मन्त्र

1 नित्योऽनित्यानां चेतनोऽचेतनाम् , एको बहूनां यो

विदधाति कामान् ।

तमात्मस्थं येऽनुपश्यन्ति धीरास्तेषां शान्तिः

                        शाश्वती नेतरेषाम् ।।        ----  कठोपनिषद

जो अनित्य पदार्थो मेँ नित्य है, अचेतन जग की एकमात्र चेतना है  जो सभी कार्यो मे समान रुप से विद्यमान है। उस ईश्वर को जो अपने मे देखता है उसी को शाश्वत शान्ति प्राप्त होती है, दुसरो को नही

2     स धाता स विधर्ता स वायुर्नम उच्छितम् ।

         सोऽर्यमा स वरुणः स रुद्रः स महादेवः।

         सो अग्निः स उ सूर्यः एव महायमः ।

वह (ईश्वर) धाता है, वह विधाता है,

वही वायु , वही आकाश मेँ उठा मेघ है ।

वही अर्यमा वही वरुण , रूद्र और महादेव है।

वही अग्नि , सूर्य और महायम है ।

3        स वरुणः सायमग्निर्भवति स मित्रो भवति प्रातरुद्यन् ।

           स सविता भूत्वान्तरिक्षण याति स इन्द्रो भूत्वा तपति मध्यतो दिवम् ॥

वह सांयकाल अग्नि और वरुण होता है

और प्रातःकाल उदय होता हुआ मित्र होता है।

वह सविता होकर अन्तरिक्ष से चलता है ,

वह इन्द्र होकर मध्य से द्युलोक को तपाता है ।

Ganesh vandana


प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायुःकामार्थसिध्दये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्त द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिग्ङाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकं ॥2॥
लम्भोदरं पञ्चम च षष्ठं विकटमेव च।
सप्तम विघ्नराजं च धूम्रवर्णँ तथाष्टमम् ॥3॥
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।
एकादशं गणपति द्वादशं तु गजाननम्॥4॥
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ॥5॥
विद्धार्थी लभते विद्धां धनार्थी लभते धनम्।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्रभिर्मासैः फलं लभेत्।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः॥7॥
अष्टभ्यो ब्राह्माणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेतः ।
तस्य विद्धा भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः॥8॥

5 comments:

  1. स्वागत है आपका, निरंतर सक्रिय लेखन से हिन्दी ब्लॉग्गिंग को समृद्ध करें
    धन्यवाद!

    - सुलभ जायसवाल सतरंगी

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  2. Sky is the limit ke liye comment post karne mein safalta nahin mili.

    ati sunder aagazz hai blog jagat mein
    वही वायु , वही आकाश मेँ उठा मेघ है ।
    वही अर्यमा वही वरुण , रूद्र और महादेव है।
    Satyan Shivam sunderam
    Devi nangrani

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  3. Bahut Barhia...aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye...

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  4. आपका स्वागत है
    शुभकामनायें



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