Saturday, September 12, 2009

पहला सफल प्रयोग

आज मैँ रसायन शास्त्र (Chemistry)  का अध्यापक हुँ एव मुझे अध्यापन मेँ आठ वर्ष का अनुभव है । मै अपनेँ विद्यार्थीयो को प्रयोगशाला (Laboratory) मेँ प्रयोग ( Experiment )  करवाता हुँ एव खुद भी अपना शोध कार्य ( research Work ) बहुलक विज्ञान( Polymer Science)  मेँ पुरा कर रहा हुँ । लेकिन मेरा पहला शोध मैने उस समय किया था , जब मैँ माध्यमिक कक्षा ( Middle Class ) मेँ पढ़ता था । सरकारी विद्यालयोँ मे ना तो उस समय ना ही आज सही तरीके सेँ विज्ञान की पढ़ाई होती है । प्रयोगिक विज्ञान ( Experimental Science ) के मामले मे तो हरियाणा के सरकारी एवँ निजी दोनो की हालात एक जैसी है । उन परिस्थितियोँ मेँ घर पर देशी प्रयोग ही मन की जिज्ञासा ( curiosity )  को शान्त करते थे। मेरा पहला प्रयोग भी मन की जिज्ञासा को शान्त करने के लिए ही था। उस समय मैँ आठवीँ क्क्षा का विद्यार्थी रहा हुँगा। उस दिन आसमान मेँ बादल छाए हुए थे एवं कुछ -कुछ बूंदाबांदी हो रही थी। मैँ अपने पैतृक कुए पर स्नान के लिए गया था। वहाँ रखे विस्फोटक रसायनिक मिश्रण (Explosive Chemical Mixture) ( जिसका प्रयोग नीलगायो को डरा कर भगाने के लिए होता था ) एवं गंधक के अम्ल( Sulphuric Acid ) ( मेरे चाचा जी बैटरी के लिए लाए थे ) को देखकर उनकी रसायनिक अभिक्रिया ( Chemical Reaction) एवं उससे होने वाले सम्भावित विस्फोट को देखने कि जिज्ञासा हुई । मैने अम्ल की बोतल रसायनिक मिश्रण मे उडेल दी (रसायनिक मिश्रण काँच कि बोतल मेँ था ।) बोतल का मुहँ अच्छी तरह बन्द करकेँ उसेँ एक चारपाई के पिछे रख दिया । थोडी देर प्रतिक्षा करने पर जब विस्फोट नही हुआ तो मैने ढक्कन को सख्ती से बन्द करने के उद्देश्य से बोतल को छुआ तो अचानक विस्फोट हो गया । मेरे शरीर के कई हिस्सोँ मेँ काँच चुभ गए थे। मैने वो काँच निकाले घाव धोए एव स्नान करके घर आ गया । उस समय परिवार जनोँ के डर से मैने ना तो उस घटना का जिक्र किया ना ही उन्हेँ घाव का पता चलनेँ दिया । लेकिन आज जब उस घटना के बारे मे सोचता हु तो बडा अजीब सा लगता है। डर भी लगता है कि कही कुछ हो जाता तो, खुशी भी होती है कि पहला ही प्रयोग एक सफल प्रयोग था ।

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